सूरजकुंड: इतिहास, मेला और यात्रा गाइड

सूरजकुंड: इतिहास, मेला और यात्रा गाइड
 परिचय:
 हरियाणा राज्य के फरीदाबाद जिले में स्थित सूरजकुंड भारत की एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है। यह स्थान न केवल प्राचीन स्थापत्य कला का उदाहरण है, बल्कि हर साल आयोजित होने वाले सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। दिल्ली से मात्र 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थल प्रकृति प्रेमियों, इतिहास के शोधकर्ताओं और कला प्रेमियों के लिए एक आदर्श गंतव्य है।
🏛️ सूरजकुंड का इतिहास
 सूरजकुंड का निर्माण 10वीं सदी में तोमर वंश के राजा सूरजपाल ने करवाया था, जो सूर्य उपासक थे। 'सूरजकुंड' नाम का अर्थ है – सूर्य का तालाब। यह एक अर्धचंद्राकार कुंड (जलाशय) है जो अरावली पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित है। इस कुंड को जल संचयन, धार्मिक अनुष्ठानों और सूर्य उपासना के लिए बनाया गया था। पास ही एक सूर्य मंदिर के अवशेष भी मिलते हैं, जो इसके धार्मिक महत्व को दर्शाते हैं।
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🎨 सूरजकुंड मेला: शिल्प, संस्कृति और परंपरा का उत्सव
 हर साल फरवरी माह में सूरजकुंड में सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला (Surajkund International Crafts Mela) आयोजित किया जाता है। यह मेला भारत सरकार के पर्यटन, कपड़ा एवं संस्कृति मंत्रालयों और हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा मिलकर आयोजित किया जाता है।
 इस मेले की खास बातें:
 देश-विदेश के शिल्पकार अपनी कला, हस्तशिल्प, कपड़े, गहने और कलाकृतियाँ प्रदर्शित करते हैं।
 हर साल एक राज्य "थीम स्टेट" के रूप में चुना जाता है, जिसकी संस्कृति, भोजन, नृत्य और संगीत को विशेष रूप से दर्शाया जाता है।
 लोक नृत्य, संगीत, कठपुतली शो, पारंपरिक व्यंजन, हस्तनिर्मित वस्तुएं – यह सब पर्यटकों को आकर्षित करता है।
 विदेशी मेहमान भी बड़ी संख्या में इसमें भाग लेते हैं, जिससे यह मेला अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हो गया है।
🏞️ पर्यटन और गतिविधियाँ
 फोटोग्राफी: सूरजकुंड का प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक रंगीन वातावरण फोटोग्राफरों के लिए स्वर्ग के समान है।
 ट्रेकिंग और प्रकृति भ्रमण: पास की अरावली पहाड़ियों में प्रकृति प्रेमियों के लिए कई ट्रेकिंग मार्ग हैं।
 स्थानीय बाजार: मेले के समय हस्तनिर्मित वस्तुएँ, पारंपरिक आभूषण, और कला की चीजें खरीदने का भी अवसर मिलता है।
🚌 कैसे पहुँचें सूरजकुंड?
 निकटतम शहर: फरीदाबाद (लगभग 8 किमी), दिल्ली (लगभग 20 किमी)
 रेलवे स्टेशन: फरीदाबाद रेलवे स्टेशन
 एयरपोर्ट: इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, नई दिल्ली
 सड़क मार्ग: दिल्ली, गुड़गांव और फरीदाबाद से बस, टैक्सी या कार के ज़रिए सरल पहुँच
📝 निष्कर्ष
 सूरजकुंड केवल एक ऐतिहासिक कुंड नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत चित्रण है। यहाँ का मेला एक ऐसा मंच है जहाँ परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम देखने को मिलता है। अगर आप भारत की लोक कलाओं, हस्तशिल्प, और सांस्कृतिक समृद्धि का अनुभव करना चाहते हैं, तो सूरजकुंड अवश्य जाएँ।

 

 


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