बरसात की शाम और अधूरी मोहब्बत की कहानी"
💖 "बरसात की शाम और अधूरी मोहब्बत की कहानी"
बरसात की एक ठंडी शाम थी। हवा में मिट्टी की खुशबू घुली हुई थी और सड़क पर पानी की छोटी-छोटी धाराएँ बह रही थीं।
रीमा बस स्टैंड पर छतरी थामे खड़ी थी, लेकिन उसकी आँखें किसी का इंतज़ार कर रही थीं… वो आएगा या नहीं, ये सवाल उसके मन में बार-बार उठ रहा था।
चार साल पहले कॉलेज में हुई पहली मुलाकात से लेकर आज तक, उनके बीच अनगिनत लम्हें थे — कॉफी पर लंबी बातें, पार्क में टहलना, और बस यूं ही एक-दूसरे को देख मुस्कुराना।
लेकिन पिछले कुछ महीनों से वह दूर-दूर सा हो गया था।
तभी अचानक, भीड़ में से एक जाना-पहचाना चेहरा नज़र आया।
वो था — आदित्य। हाथ में गुलाब का फूल और आँखों में वही पुराना स्नेह।
रीमा के होंठों पर हल्की मुस्कान आ गई, लेकिन दिल में सवाल अभी भी बाकी था — "क्या वो अब भी मेरा है?"
आदित्य पास आया, उसने रीमा का हाथ थामा और धीमे से कहा —
"रीमा, माफ करना… जिंदगी की दौड़ में तुम्हें खोने ही वाला था, लेकिन अब कभी नहीं खोऊँगा।"
उस पल, बारिश की बूंदों में भी जैसे एक मीठी गर्माहट घुल गई।
दोनों भीगते हुए बस हँस पड़े…
और शायद, अधूरी मोहब्बत अब पूरी होने वाली थी।
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